जैसे अपोलिनेयर, गैरी, मोपासां, कोक्तो, फिट्ज़जेराल्ड या नाबोकोव, कार्ल ने भी अपने ढंग से कोट डाज़ूर पर अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 80 के दशक के आरंभ में रिवेरा आना-जाना शुरू किया, जब वे शैनेल में काम करने लगे। बहुत जल्द वे इस क्षेत्र के प्रेम में पड़ गए, विशेषकर मोनाको और राजसी परिवार के प्रति, जिनके लिए उनके मन में सदैव गहरी प्रशंसा और असीम स्नेह रहा। वे यहाँ अक्सर ठहरते थे, न केवल प्रसिद्ध विला विजी में, बल्कि विभिन्न अपार्टमेंटों में भी।


90 के दशक के आरंभ में उन्होंने मोंटे-कार्लो बैले और ऑपेरा के लिए पोशाकें डिज़ाइन कीं। वर्ष 1999 में पहली बार कार्ल ने महामहिम प्रिंस रेनियर III के अनुरोध पर बॉल ऑफ़ द रोज़ की मंच-सज्जा में भाग लिया। इसके बाद के वर्षों में वे राजकुमारी कैरोलीन के साथ इस भव्य बॉल की थीम तैयार करने में सहभागी रहे।

कार्ल यहीं नहीं रुके; वर्षों तक वे मोनाको में निरंतर नई परियोजनाएँ करते रहे, जैसे होटल मेट्रोपोल की शानदार भित्ति-चित्रकारी, कैसीनो में एक लघु फ़िल्म, और सैले गार्नियर में एक फ़ैशन शो।..

अंत को शानदार बनाने के लिए उन्होंने 65वें बॉल ऑफ़ द रोज़ के लिए 1950 के दशक की रिवेरा की थीम चुनी, जो कोट डाज़ूर को अंतिम श्रद्धांजलि थी, जिसमें बीते सुनहरे दिनों के रिवेरा के माहौल को याद दिलाते भव्य सेट थे।



ज़ाँ-पॉल सार्त्र ने कहा था: «हम अपने समय का कुछ भी छूटने नहीं देना चाहते; हो सकता है इससे सुंदर समय भी रहे हों, पर यह हमारा समय है»। कार्ल ने अपने समय का कुछ भी नहीं छोड़ा, पर यह निश्चित है कि कोट डाज़ूर को उनकी कमी खलेगी…
स्रोत: Nice Matin, Wikipedia, Madame Le Figaro. तस्वीरें: Site officiel Monte-Carlo SBM.
Leave a Reply